धन वसूली सम्बन्धित डिक्री वाद प्रारूप | Money Recovery Decree Suit format .Docx (PDF)

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धन वसूली और उससे सम्बन्धित डिक्री के वसूल करने का वाद (Money Recovery Decree format)

अंकन रु. ……….. धन वसूली और उससे सम्बन्धित डिक्री के वसूल करने का वाद

(Suit for recovery of Rs. and for money decree in respect of the above amount)

न्यायालय…………

वाद नंबर ………… सन् …………

अ.ब.स. …………                                                                                                            वादी

बनाम

स.द. फ. …………                                                                                                      प्रतिवादी

उपरोक्त नामित वादी निम्न प्रकार सविनय निवेदन करता है :

  1. यह कि वादी द्वारा यह वाद अंकन ………… की धनराशि 18% ब्याज सहित की वसूली हेतु योजित किया जा रहा है।
  2. यह कि वाद पत्र पर हस्ताक्षर, सत्यापन एवं दायरा श्री ………… द्वारा किया गया है। श्री ………… वाद को योजित करने सत्यापन करने और वर्तमान वाद और संगलग्न प्रपत्रों आदि पर हस्ताक्षर करने हेतु सक्षम व प्रधिकृत है।
  3. यह कि प्रतिवादी ………… नाम की व्यापारिक संस्था का एक मात्र स्वामी है। इसी के साथ-साथ प्रतिवादी द्वारा विभिन्न विद्युत उपकर्णों की खरीद फरोख्त का व्यापार भी करता है जिसमें वादी द्वारा उत्पादित आइटम भी सम्मिलित हैं।
  4.  यह कि वादी विभिन्न वाटेज की अनेकों विद्युत आईटम जिनमें बिजली की फ्लोरीसेंट टयूब एवं बल्ब भी सम्मिलित हैं प्रतिवादी को समय-समय पर सप्लाई करता रहा है । वाद पत्र की विषय वस्तु में फ्लोरीसेंट टयूब और बल्ब ही विभिन्न सप्लाई में उक्त अवधि के दौरान रही है।
  5. यह कि वादी द्वारा दिनाँक ………… से दिनाँक ………… की अवधि में अनेकों वीजक व विद्युत उपकरणों की आपूर्ति जो प्रतिवादी द्वारा की गई प्राप्त किये गये हैं।
  6.  यह कि समय-समय पर प्रतिवादी द्वारा वादी से यह अनुरोध किया जाता रहा है कि बकाया धनराशि के भुगतान के लिए अवधि को बढ़ा दें प्रतिवादी अनाद्रित चैकों के भुगतान में भी बहाने बनाता रहा और भुगतान से बचता रहा है । बार बार के अनुरोध के कारण और गिड़गिड़ाने की वजह से अभी तक वादी द्वारा कोई कानूनी कार्यवाही नहीं की गई थी।
  7.  यह कि दिनांक ………… को अन्त में वादी द्वारा अपने अधिवक्ता के माध्यम से प्रतिवादी को कानूनी नोटिस दिया गया जिसमें धारा 403, 417, 418 और 420 भा०द०सं०, 1860 के तहत कार्यवाही करने के लिए आगाह किया गया। वादी द्वारा दूसरा नोटिस भी प्रतिवादी को दिनांक …………. को अधिवक्ता के माध्यम से यह कहते हुए निर्गत किया गया कि वह ब्याज सहित बकाया मूल धनराशि को तुरन्त भुगतान करे।
  8. यह कि इसके उपरान्त एक बार फिर दिनाँक ………… को समयावधि समाप्त होने से पर्व प्रतिवादी द्वारा वादी से बकाया धनराशि ब्याज सहित लौटाने हेतु कुछ समय बढ़ाने का अनुरोध लिखित में किया गया था।
  9. यह कि वादी को प्रतिवादी द्वारा रचे गये धोखाधड़ी के बारे में प्रथम बार पता चला और बैंक के पत्र दिनाँक ………… से यह भी ज्ञात हुआ कि प्रतिवादी द्वारा निर्गत चैक अनाद्रित थे तब तक बहुत विलम्ब हो चुका था जब वादी को इस बात का पता चला कि उक्त अनाद्रित-चैकों को प्रतिवादी द्वारा बेइमानी से और गैर कानूनी तरीके से बैंक से प्राप्त कर लिया गया था। वास्तव में केवल यह तब पता चला जब दिनांक ……….. को वादी द्वारा कथित बैंक से डेबिट एडवाइसेज को हस्तगत करने को कहा था और प्रथम बार वादी द्वारा उन डेबिट एडवाइसेज को प्राप्त किया गया था। _
  10. यह कि इस वाद पत्र के योजित करने की तिथि को प्रतिवादी की ओर कुल धनराशि अंकन रु० ………… वाजिब थी जिसमें रु० ………… मूल धनराशि और रु० ………… ब्याज ते शुदा 18% वार्षिक की दर से सम्मिलित है । वादी ब्याज की उक्त दर के लिए व्यवसायिक व्यवहार की दृष्टि से तथा साथ ही साथ ब्याज अधिनियम, 1978 के प्राविधान के तहत अधिकारी है।
  11. यह कि वादी इसी प्रकार से भविष्य में और वाद कालीन ब्याज 18% की दर से जैसा कि वादी और प्रतिवादी के मध्य तै है का भी हकदार है । इसके अतिरिक्त व्यापारिक व्यवहार की दृष्टि से भी वादी उक्त ब्याज दर का अधिकारी है और ब्याज अधिनियम, 1978 के प्राविधान के तहत भी वादी ब्याज दर का हकदार है।
  12. यह कि वाद का कारण वादी के हित में तथा प्रतिवादी के विरूद्ध तब उत्पन्न हुआ जब

…. माह में वादी द्वारा प्रतिवादी को विद्युत के सामान की सप्लाई की गई जो कि प्रतिवादी द्वारा प्राप्त भी की गई और बिल/चालान निर्गत किये गये थे। दूसरे माह ………… में जब प्रतिवादी द्वारा कई चैक निर्गत किये गये थे और दोबारा जब वे अनाद्रित हो गये थे और पुन: जब प्रतिवादी द्वारा उन्हें बदनियति और गैर कानूनी तरीके से (अनाद्रित चैकों को) बैंक से प्राप्त कर लिया गया था

और पुन: जब वादी को पता चला कि कथित चैक अनाद्रित हो गये हैं और पुन: ………… माह में जब प्रतिवादी द्वारा रु० ………… का भुगतान किया गया जो कई बार में नकद रुप में था और अन्तिम बार जब दिनांक ………… को कानूनी नोटिस वादी द्वारा प्रतिवादी को दिये गये और प्रतिवादी द्वारा प्राप्त भी किये गये।

  1. यह कि वाद का मूल्यांकन रु० ………… है जिस पर तदनुसार कोर्ट फीस अदा की गई है । इस मान्य न्यायालय को वाद को तय करने का क्षेत्राधिकार प्राप्त है।
  2. यह कि केवल दिनांक ………… को वादी को प्रथम बार ज्ञात हआ कि उक्त चैक जो वाद पत्र के पैरा………… में दर्ज है अनाद्रित हो गये थे और भुगतान प्राप्त नहीं हुआ था लिमिटेशन की अवधि उक्त तिथि से ही प्रारम्भ होगी। इसके अतिरिक्त प्रतिवादी की बकाया की अभिस्वीकृत तथा समय समय पर रु० ………… का भुगतान किया गया है तो भी नये सिरे से परिसीमा भुगतान की दिनांक ………… से लगेगी। इस प्रकार से भी वाद लिमिटेशन की अवधि के अन्तर्गत ही है ।
  3. यह कि माल दिल्ली सप्लाई किया गया था, चैक भी दिल्ली से ही निर्गत किये गये थ और दिल्ली से ही अनादर हए थे। प्रतिवादी द्वारा भुगतान भी दिल्ली में ही किये गये थे आर वादा तथा प्रतिवादी के मध्य हए करार के अनुसार भी वाद पत्र की विषय वस्तु दिल्ली में हा स्थित छ । अत: इस मान्य न्यायालय को वाद को सुनने का क्षेत्राधिकार प्राप्त है ।

अनुतोष की मांग :

उपरोक्त नामित वादी निम्न अनतोष की माँग करता है। अत: अत्यन्त सम्मान पूर्वक प्राय जाती है कि मान्य न्यायालय निम्न अनुतोष प्रदान करने की कृपा करे।

 (क) अंकन रु० ………… की डिक्री वादकालीन और भविष्य के ब्याज सहित @ 18% वार्षिक वाद दायर करने की तिथि से डिक्री की रकम प्राप्त होने की तिथि तक वादी को दिलवायी जाए। __

(ख) कृपया और अन्य आदेश अथवा अनुतोष भी पारित किया जाए जिसे मान्य न्यायालय वाद की परिस्थितियों को देखते हुए उचित समझे।

(ग) वादी को वाद का व्यय दिलाया जावे।

वादी ……………………….

द्वारा अधिवक्ता ………………………

सत्यापन

 मैं कि ………… कम्पनी सेक्रेट्री और अधिकृत अटार्नी वादी के रूप में प्रमाणित करता हूँ कि वाद पत्र के पैरा 1 से 11 मेरी निजी जानकारी में है जो मेरी जानकारी में सत्य है तथा पैरा 12 से 15 कानूनी सलाह के आधार पर है जो कि मेरे विश्वास में सत्य है । अन्तिम पैरा प्रार्थना के रूप में है।

   सत्यापन :–  दिनांक ………… दिन ………… स्थान ………… (वादी)

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