शीतला माता की कहानी | Sheetla Mata Ki Kahani

पढ़िए sheetla mata kahani in hindi शीतला माता जी की पूर्ण कथा एवं शीतला सप्तमी से जुड़ी सभी घटनाओं की कहानी हिंदी भाषा में (Sheetla Mata Story in Hindi) भारतीय पुराणिक कथाओं एवं कहानियों के अनुसार इस धरती पर अलग अलग युगों में कई देवी देवताओं ने मनुष्य रूप अवतार लिया हैं। उससे एक नई पुराणिक कथा/कहानी का आरम्भ होता हैं, जो भारतीय संस्कृति एवम रीति रिवाजों के प्रमुख आधार बनते हैं।

कौन है देवी शीतला माता।

Who is MAA sheetla? — श्री शीतला माता जी एक पुराणिक प्रसिद्ध हिन्दू देवी है ये चेचक जैसे रोग की देवी हैं, इनके हाथों में कलश, सूप, मार्जन (झाडू) तथा नीम के पत्ते धारण किए होती हैं तथा गर्दभ की सवारी पर अभय मुद्रा में विराजमान हैं। कहते हैं कि शीतला माता की पूजा से चेचक का रोग ठीक होता है। शीतला माता हर प्रकार के तापों का नाश करती हैं और अपनी पूजा करनेवालों एवं भक्तों के तन-मन को शीतल करती हैं।

देवी शीतला माता की उत्पत्ति

पौराणिक स्कंद पुराण कथा के अनुसार माता शीतला देवी की उत्पत्ति भगवान ब्रह्मा जी से हुई थी तथा यह देवी भगवान शिव की यह जीवनसंगिनी और शक्ति अवतार है।

शीतला माता का पर्व

Mata Sheetla देवी का पर्व हिन्दू पंचांग के अनुसार होली के सात दिनों बाद चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी (सातम) तिथि को मनाया जाता है। इसे शीतला सप्तमी, बसौरा या बसौड़ भी कहते हैं। बसोरा का अर्थ होता है बासी भोजन। क्योंकि देवी शीतला माता की पूजा के दिन किसी के भी घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता हैं।

देवी शीतला माता मंत्र । Sheetla Mata Mantra

जय जय माता शीतला तुमही धरे जो ध्यान। होय बिमल शीतल हृदय विकसे बुद्धी बल ज्ञान।।

घट घट वासी शीतला शीतल प्रभा तुम्हार। शीतल छैंय्या शीतल मैंय्या पल ना दार।।

श्री देवी शीतला माता की कथा (history of sheetla mata)

MATA SHEETALA DEVI KI KATHA — चैत्र का महीना आया, होली के बाद के दिन आये और शीतला सप्तमी आई। सभी लोग कहने लगे की “माता आई… माता आई…” किसी ने हलवा बनाया, तो किसी ने खीर पूरी बनाई, और गरमा गरम पकवानों का भोग लगाया।

माता के अंग – अंग में आग जलने लगी तो माता भागी – भागी कुम्हार के घर गई और कुम्हार से कहा की मेरा अंग – अंग जल रहा है मुझे ठंडी मिट्टी में लेटना है। ठंडी मिट्टी में लेटने से माता को थोड़ी ठंडक मिली और कहा की कुम्हार मुझे भूख लगी है तो कुम्हार ने रात की ठंडी रोटी माता को खाने के लिए दे दी। इससे माता को राहत मिली और कुम्हार पर खुश हुई।

माता ने कहा की पूरी नगरी में हाहाकार होगी, केवल तेरा ही घर बचेगा। पुरे नगर में त्राहि मच गई और कुम्हार का घर बच गया। तो नगर वालों ने कुम्हार से कहा की तूने कोई जादू टोना किया है। क्या जिससे पूरा नगर नष्ट हो गया और तेरा घर बच गया।

कुम्हार ने कहा की मैंने कोई जादू – टोना नही किया है मैंने तो बस माता को शीतल किया है। आप सब लोगो ने माता को गर्म – गर्म खाने का भोग लगाया था तो माता के अंग अंग में फफोले हो गये थे इसी कारण माता का प्रकोप हुआ है और पुरे नगर में त्राहि मची।

तब लोगों की आँखें खुली और कुम्हार से कहा की माता कहा है। कुम्हार ने बताया की माता नीम के निचे ठंडी छाया में बैठी है सभी नगर वाले माता के पास गये और विनती की और क्षमा मांगने लगे। तो माता बोली की तुम सभी ने मुझे गर्म भोजन करवाया जिससे मेरी जीभ पर छाले हो गये, कुम्हार ने मुझे ठंडा भोजन करवाया, जिससे मुझे ठंडक मिली इसी कारण पूरा नगर नष्ठ हो गया और मेरी कृपा से कुम्हार का घर महल बन गया।

लोगों ने माता से विनती की और कहा की अब हम क्या करें तो माता ने बताया की होली के 7 दिन बाद शीतला सप्तमी आती है उस दिन सभी गांव वाले और औरतें षष्ठी (छठ) के दिन बनाये हुए ठंडे खाने से मुझे भोग लगाये और पूजा करे।

12 महीने बाद वापस शीतला सप्तमी आई राजा ने पुरे नगर में ढिढोरा पिटवा दिया की होली के बाद 7 दिन तक सब शीतला माता का अगता रखेंगे यानि की कोई सिर नही धोये व सिलाई, कुटना, पिसना आदि नही करें। लोगो ने भी वैसा ही किया। देवी शीतला माता प्रसन्न हुई पुरे नगर में आनन्द हुआ।

देवी शीतला माता आप सभी पर मेहरबान रहे। जय शीतला माता की

आरती शीतला माता जी की । sheetla mata aarti

जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता,
आदि ज्योति महारानी सब फल की दाता। जय शीतला माता…

रतन सिंहासन शोभित, श्वेत छत्र भ्राता,
ऋद्धि-सिद्धि चंवर ढुलावें, जगमग छवि छाता। जय शीतला माता…

विष्णु सेवत ठाढ़े, सेवें शिव धाता,
वेद पुराण बरणत पार नहीं पाता । जय शीतला माता…

इन्द्र मृदंग बजावत चन्द्र वीणा हाथा,
सूरज ताल बजाते नारद मुनि गाता। जय शीतला माता…

घंटा शंख शहनाई बाजै मन भाता,
करै भक्त जन आरति लखि लखि हरहाता। जय शीतला माता…

ब्रह्म रूप वरदानी तुही तीन काल ज्ञाता,
भक्तन को सुख देनौ मातु पिता भ्राता। जय शीतला माता…

जो भी ध्यान लगावें प्रेम भक्ति लाता,
सकल मनोरथ पावे भवनिधि तर जाता। जय शीतला माता…

रोगन से जो पीड़ित कोई शरण तेरी आता,
कोढ़ी पावे निर्मल काया अन्ध नेत्र पाता। जय शीतला माता…

बांझ पुत्र को पावे दारिद कट जाता,
ताको भजै जो नाहीं सिर धुनि पछिताता। जय शीतला माता…

शीतल करती जननी तू ही है जग त्राता,
उत्पत्ति व्याधि विनाशत तू सब की घाता। जय शीतला माता…

दास विचित्र कर जोड़े सुन मेरी माता,
भक्ति आपनी दीजे और न कुछ भाता। जय शीतला माता…।

श्री शीतला चालीसा । Sheetla Mata Chalisa in hindi

जय जय श्री शीतला भवानी। जय जग जननि सकल गुणधानी।।
गृह गृह शक्ति तुम्हारी राजती। पूरन शरन चंद्रसा साजती।।
विस्फोटक सी जलत शरीरा। शीतल करत हरत सब पीड़ा।।
मात शीतला तव शुभनामा। सबके काहे आवही कामा।।
शोक हरी शंकरी भवानी। बाल प्राण रक्षी सुखदानी।।
सूचि बार्जनी कलश कर राजै। मस्तक तेज सूर्य सम साजै।।
चौसट योगिन संग दे दावै। पीड़ा ताल मृदंग बजावै।।
नंदिनाथ भय रो चिकरावै। सहस शेष शिर पार ना पावै।।

धन्य धन्य भात्री महारानी। सुर नर मुनी सब सुयश बधानी।।
ज्वाला रूप महाबल कारी। दैत्य एक विश्फोटक भारी।।
हर हर प्रविशत कोई दान क्षत। रोग रूप धरी बालक भक्षक।।
हाहाकार मचो जग भारी। सत्यो ना जब कोई संकट कारी।।
तब मैंय्या धरि अद्भुत रूपा। कर गई रिपुसही आंधीनी सूपा।।
विस्फोटक हि पकड़ी करी लीन्हो। मुसल प्रमाण बहु बिधि कीन्हो।।
बहु प्रकार बल बीनती कीन्हा। मैय्या नहीं फल कछु मैं कीन्हा।।
अब नही मातु काहू गृह जै हो। जह अपवित्र वही घर रहि हो।।

पूजन पाठ मातु जब करी है। भय आनंद सकल दुःख हरी है।।
अब भगतन शीतल भय जै हे। विस्फोटक भय घोर न सै हे।।
श्री शीतल ही बचे कल्याना। बचन सत्य भाषे भगवाना।।
कलश शीतलाका करवावै। वृजसे विधीवत पाठ करावै।।
विस्फोटक भय गृह गृह भाई। भजे तेरी सह यही उपाई।।
तुमही शीतला जगकी माता। तुमही पिता जग के सुखदाता।।
तुमही जगका अतिसुख सेवी। नमो नमामी शीतले देवी।।
नमो सूर्य करवी दुख हरणी। नमो नमो जग तारिणी धरणी।।

नमो नमो ग्रहोंके बंदिनी। दुख दारिद्रा निस निखंदिनी।।
श्री शीतला शेखला बहला। गुणकी गुणकी मातृ मंगला।।
मात शीतला तुम धनुधारी। शोभित पंचनाम असवारी।।
राघव खर बैसाख सुनंदन। कर भग दुरवा कंत निकंदन।।
सुनी रत संग शीतला माई। चाही सकल सुख दूर धुराई।।
कलका गन गंगा किछु होई। जाकर मंत्र ना औषधी कोई।।
हेत मातजी का आराधन। और नही है कोई साधन।।
निश्चय मातु शरण जो आवै। निर्भय ईप्सित सो फल पावै।।

कोढी निर्मल काया धारे। अंधा कृत नित दृष्टी विहारे।।
बंधा नारी पुत्रको पावे। जन्म दरिद्र धनी हो जावे।।
सुंदरदास नाम गुण गावत। लक्ष्य मूलको छंद बनावत।।
या दे कोई करे यदी शंका। जग दे मैंय्या काही डंका।।
कहत राम सुंदर प्रभुदासा। तट प्रयागसे पूरब पासा।।
ग्राम तिवारी पूर मम बासा। प्रगरा ग्राम निकट दुर वासा।।
अब विलंब भय मोही पुकारत। मातृ कृपाकी बाट निहारत।।
बड़ा द्वार सब आस लगाई। अब सुधि लेत शीतला माई।।

यह चालीसा शीतला पाठ करे जो कोय। सपनें दुख व्यापे नही नित सब मंगल होय।।
बुझे सहस्र विक्रमी शुक्ल भाल भल किंतू। जग जननी का ये चरित रचित भक्ति रस बिंतू।।
॥ इतिश्री शीतला माता चालीसा समाप्त॥

देवी sheetla mata की चालीसा का पवित्र पाठ करने पर धन, आरोग्य और वैभव की प्राप्ति होती हैं।

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